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ध्यान की मौन यात्रा: जब प्रेम और जागरूकता एक हो जाते हैं

December 25, 2025-

जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मनुष्य हर जगह कुछ पाने की दौड़ में लगा है — लेकिन खुद को ही भूल गया है। हर पल, हर सांस में वह कुछ खोजने की कोशिश करता है जिसे वह पहले ही खो चुका होता है...

ध्यान का गहरा सागर: जागृति की उस शांति तक जहाँ प्रेम जन्म लेता है

December 18, 2025-

जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मनुष्य हर उस चीज़ की तलाश में भागता है जो पहले से उसके भीतर मौजूद है। बाहर की दुनिया में उसे सुख की झलक मिलती है, पर आत्मा के गहरे गर्भ में ही सच्ची शांति जन्म लेती है।...

जागृति — प्रेम और ध्यान की यात्रा

December 17, 2025-

प्रस्तावना: भीतर की यात्रा की शुरुआत जीवन का हर क्षण एक दर्पण है — वह हमें दिखाता नहीं कि दुनिया क्या है, बल्कि यह कि हम कौन हैं। जब मानव बाहर की ओर देखता है, तो उसे केवल परछाइयाँ दिखाई देती हैं; जब वह भीतर मुड़ता है,...

ध्यान का मौन: भीतर की यात्रा जहाँ प्रेम जन्म लेता है

December 17, 2025-

जीवन अक्सर हमें बाहर की दौड़ में उलझा देता है। हम उपलब्धियों के पीछे भागते हैं, संबंधों में खो जाते हैं, और फिर भी भीतर एक रिक्तता बनी रहती है। ओशो कहते हैं — “मनुष्य का असली घर भीतर है, लेकिन वह हमेशा बाहर भटक रहा...

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